संजीवनी साबित होगा कार्बन न्यूट्रल प्रोजेक्ट

संजीवनी साबित होगा कार्बन न्यूट्रल प्रोजेक्ट

जम्मू/लेह
देश में पहला कार्बन न्यूट्रल प्रदेश बनने की ओर अग्रसर लद्दाख के लिए यह परियोजना कई मायनों में अहम है। यह न सिर्फ लद्दाख के मौजूदा वातावरण और जलवायु को बनाए रखने में मददगार साबित होगी, बल्कि हिमालयी प्रदेशों के लिए नजीर भी बनेगी। स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में लाल किले की प्राचीर से अपने संबोधन में लद्दाख को कार्बन न्यूट्रल प्रदेश में परिवर्तित करने की घोषणा की। हालांकि, लद्दाख को कार्बन न्यूट्रल प्रदेश बनाने की कवायद तेजी से शुरू हो चुकी है।

लद्दाख प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि लद्दाख को कार्बन न्यूट्रल प्रदेश बनाने के लिए केंद्र की एक टीम काम कर रही है। एलजी प्रशासन इस टीम के साथ मिलकर काम कर रहा है। मार्च माह में चार दिवसीय सम्मेलन भी हो चुका है। लद्दाख को कार्बन न्यूट्रल प्रदेश बनाने के लिए सबसे पहले यहां कार्बन उत्सर्जन के आंकड़े जुटाए गए हैं। इन आंकड़ों के मुताबिक लद्दाख में होने वाला कार्बन उत्सर्जन देश भर के उत्सर्जन का 0.1 फीसदी पाया गया है। यानी लद्दाख में प्रदूषण नहीं के बराबर है। कार्बन न्यूट्रल परियोजना के तहत लद्दाख में प्रदूषण से जुड़ी गतिविधियों को नियंत्रित रूप से संचालित करने की व्यवस्था होगी।
दफ्तरों, संस्थानों में प्लास्टिक पर रोक
लद्दाख को कार्बन न्यूट्रल बनाने की दिशा में एलजी प्रशासन सरकारी दफ्तरों और संस्थानों में प्लास्टिक बोतलों के इस्तेमाल पर रोक लगा चुका है। जून में लगाई गई पाबंदी के बाद एयरपोर्ट पर प्लास्टिक बोतलों के निस्तारण की मशीन भी स्थापित की गई है।

किसे कहते हैं कार्बन न्यूट्रल क्षेत्र
मानव गतिविधियों की वजह से कार्बन डाईऑक्साइड समेत कई ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन होता है। कार्बन न्यूट्रल व्यवस्था के तहत प्रदूषण के पैमाने का आंकड़ा जुटाया जाता है और फिर इस प्रदूषण को निरंतर खत्म करने का तंत्र विकसित किया जाता है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने बताया कि लद्दाख में प्रदूषण काफी कम है। इसे कार्बन न्यूट्रल बनाने के लिए उत्सर्जित गैसों के निस्तारण की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा नए वाहनों से लेकर नए उद्योग स्थापित करते समय इस बात का खास ख्याल रखा जाएगा कि हरी श्रेणी वाले उद्योग और प्रदूषण रहित वाहनों को ही अनुमति मिले।

7500 मेगावाट के सोलर पार्क की टेंडर अवधि बढ़ी
लद्दाख में देश के सबसे बड़े 7500 मेगावाट क्षमता के सोलर पार्क का प्रोजेक्ट आगे बढ़ गया है। लद्दाख समेत पूरे देश में कार्बन न्यूट्रल उपायों के लिए बड़ी शुरुआत इस परियोजना के लिए जुलाई अंत तक टेंडरिंग होनी थी। सोलर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने टेंडरिंग के लिए तारीख अब 30 नवंबर 2020 कर दी है। लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद लेह के अध्यक्ष ग्याल पी वांग्याल के अनुसार इस परियोजना पर लंबे समय से कवायद चल रही है। कई बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन इस पर काम शुरू करने में देरी हो रही है।

 

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